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पानी के लिए भटकता हिरण कुंए में गिरा, ग्रामीणों ने जान बचाकर वन विभाग को सौंपा

जगदलपुर। चैत्र मास की शुरूवात से ही गर्मी ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है और तापमान लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इससे वन्य क्षेत्रों में रहने वाले जानवरों को दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है। पानी की तलाश में उन्हें एक ओर जहां भटकना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों द्वारा सामूहिक शिकार किये जाने का भी सामना करना पड़ रहा है।


माचकोट वन क्षेत्र के अंतर्गत एक छोटा सा उदाहरण सामने आया है, जिसमें एक प्यासा चीतल पानी की खोज में कुरंदी तालाब की ओर आया और उसे एक ओर गांव में मौजूद कुत्तों ने दौड़ाया वहीं दूसरी ओर पानी भी नहीं मिला और जान बचाने के लिए दौड़ते-दौड़ते वह एक सुखे कुंए में गिर गया। लगभग 15 घंटे के बाद कचरा फेंकने गई महिला के देखने से उसका संरक्षण किया गया और वन विभाग के कर्मचारियों ने उसे बाहर निकाल जंगल में छोड़ दिया। वहीं दूसरी ओर ग्राम चिलकुटी के जंगल में विचरण कर रहे तेंदुआ द्वारा चीतल को शिकार बनाने की जानकारी भी प्राप्त हुई है। यह चीतल भी पानी की तलाश में भटक रहा था।
उल्लेखनीय है कि वन क्षेत्रों में स्थित जंगली नाले व पानी के छोटे पोखर व तालाब सुख गये हैं और वनों में रहने वाले जानवर पानी की तलाश में बस्ती के पास आकर अपनी जान गंवा रहे हैं। प्रतिवर्ष जंगलों में स्थित पानी के श्रोत सूखते हैं, लेकिन इस वर्ष मौसम के अचानक परिवर्तन से जल्दी ही सूख गये हैं। जंगलों में वर्षाकाल में जानवरों के लिए जल श्रोत बनाने की ओर न तो वन विभाग का ध्यान जाता है और न ही पर्यावरण पे्रमियों को। इससे इस वर्ष और अधिक जंगली जानवरों की सुरक्षा दांव पर लग गई है। शहर या गांव के पास पानी की तलाश में आने वाले ये जानवर आकर केवल अकाल मृत्यु का शिकार होकर रह जाते हैं। इस स्थिति को वन क्षेत्रों में पानी की व्यवस्था कर बदला जा सकता है।

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