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आदिवासियों की मांग पर सरकार शीघ्र से शीघ्र निर्णय ले – केदार

जगदलपुर, 14 जून । पिछले 6 दिनों से हजारों की संख्या में आदिवासी दंतेवाड़ा जिले के किरंदुल में जमे हुए थे। जिनकी मांगो को सुनने और तत्काल हल निकालने के लिए राज्य शासन का कोई मंत्री और उच्च स्तरीय दल नहीं पहुंचा। बस्तर के आदिवासियों ने अपने भोलेपन और सहनशीलता का उदाहरण देते हुए आंदोलन से हट गए। पूर्व मंत्री केदार कश्यप ने चर्चा में कहा कि उद्योग मंत्री कवासी लखमा विदेश भ्रमण पर हैं और मुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार का कोई भी मंत्री किरन्दुल नहीं पहुंचा।

सांसद, विधायकों और प्रशासन पर पूरा मामला छोड़ दिया गया था। जबकि किरन्दुल में 6 दिन तक चले आंदोलन से स्थिति बिगड़ सकती थी। उन्होंंने कहा कि आदिवासियों ने जो मांग रखी है वह जायज है उस पर जल्द से जल्द सरकार निर्णय ले। पहाड़ी में वनवासियों के ईष्ट देवता हैं, इसलिए जनभावना का सम्मान होना चाहिए।

कश्यप ने कहा कि बस्तर का यह इलाका काफी संवेदनशील है। उपर से गर्मी का सीजन चल रहा है, तपती धूप में आंदोलन में शामिल सैकड़ों लोग बीमार भी पड़ गये। शासन अगर चाहती तो उसी दिन आंदोलन समाप्त हो जाता जिस दिन मुख्यमंत्री के साथ बस्तर के जनप्रतिनिधियों की चर्चा हुई। चर्चा के बाद रायपुर से हेलीकाप्टर से यहां के नेताओं को रवाना कर दिया गया। जबकि उनके साथ राजधानी से भी राजस्व और वन से संबंधित मंत्री अथवा उच्चाधिकारी आ जाते तो मामला आगे नहीं बढ़ता।

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