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लेख : वायु प्रदूषण बन रही हैं मौत का कारण- दीपक पटेल

जिस हवा को भारतीय सांस लेने के लिए उपयोग करते हैं, वे दिन प्रतिदिन प्रदूषित होते चला जा रहा है। भारत मे वायु प्रदूषण एक जटिल समस्या बन गया है। वायु प्रदूषण मौत का सबसे बड़ा कारक है। इनका खासा असर बच्चों पर पड़ रहा है। युवा 30 की उम्र पार करते-करते अपने 30-40% लंग्स खराब कर चुके होते हैं। हमारे द्वारा उपयोग की जाने वाली पुराने वाहनों से निकलने वाले धुंए एवं कारखानों से निकलने वाले विषैले गैस मानवजाति के स्वास्थ्य के लिये हानिकारक हैं।

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दि लैंसेट प्लेनैट्री हेल्थ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत में 8 में से 1 की मौत वायु प्रदूषण से होती है।6.7 लाख लोग आउटडोर वायु प्रदूषण के शिकार हुए हैं वहीं 4.8 लाख लोगों को इंडोर एयर पॉल्यूशन की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं पूरी दुनिया की बात करे तो हर साल 90 लाख लोगों की की मौत प्रदूषित वायु से होती है। इससे लोगों की औसत वायु 1.7 वर्ष घटते जा रही है। बीते 2017 में वायु प्रदूषण के कारण भारत में लगभग 12.4 लाख लोगों की मौत हुई हैं। यहाँ की वायु की गुणवत्ता की बात करें तो पीएम 2.5 का स्तर भारत मे हर साल विश्व की औसत से ज्यादा होता है।

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भारत सरकार उज्ज्वला योजना के तहत 2018 में लगभग 4-5 करोड़ लोगों को गैस कनेक्शन मुहैया करा चुकी है जो अब साल 2019 में 8 करोड़ लोगों को गैस कनेक्शन से लाभान्वित करने की योजना बना रही है। दरअसल सॉलिड फ्यूल के इस्तेमाल से वायु काफी ज्यादा प्रदूषित होता है। इतना ही नहीं वायू प्रदूषण से लंग कैंसर,डायबिटीज, क्रोनिक फेफड़े की बीमारी,इस्केमिक दिल का रोग उसी पैमाने पर होता है जितना की तंबाकू के प्रयोग से होता है।


दीपक पटेल
लाहोद, बलौदा बाजार

 

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